माइक्रो-एस.एम.ई. के लिए ऊँचाइयाँ छूना। हर दिन के चैलेंज और प्रॅक्टिकल सोल्यूशन

Online invoice generator for small business

माइक्रो एस.एम.ई भारतीय अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा हैं जो अलग-अलग  क्षेत्रोंमें अपनी पकड़ मज़बूत करते जा रहे हैं। पिछले कुछ सालों से उनका लोगों के जीवन और अर्थव्यवस्था पर काफी असर हो रहा है। इनमें से ज्यादातर कंपनियाँ ऐसे लोग चलाते हैं जो सेल्फ-मोटिवेटेड हैं, जिनमें अपना बिज़नेस बढाने का जुनून है और जो अपने बिज़नेस के लिए काफी मुनाफा कमा रहे हैं। हालाँकि इन माइक्रो एस.एम.इ. की ख़ासियत है कि वो हर दिन की गतिवीधियों और फायनांस पर बारीकी से ध्यान देते हैं, लेकिन इनके मालिक खुद सारे लेन-देन का हिसाब-किताब रखते हैं और मॅनुअली उनकी बुक-कीपिंग करते हैं। इससे किसी और काम के लिए वक्त ही नहीं बचता। उनके लिए फायनांस बहुत अहमियत रखता है, इसलिए रीसीवेबल्स और पेमेंट्स की इनवॉइसिंग करना, वक्त पर पेमेंट ना मिले तो देनदारों से फॉलो-अप करना, अकाउँट्स को रीकंसाईल करना, बिल्स को वक्त पर भरना, इन सबसे उनकी ज़िंदगी दूभर हो जाती है। कॅपिटल कम होने की वजह से उन्हें आसानी से लोन नहीं मिल पाता और इससे वे आगे तरक्की नहीं कर पाते।

इसका राज़ है वर्किंग कॅपिटल को स्ट्रीमलाईन करना

ये सभी बातें यह साबित करती है कि इन सभी समस्याओं की जड़ है वर्किंग कॅपिटल का मिसमॅनेजमेंट और पैसों की कमी, और बाकी सभी समस्याएँ यहीँ से शुरु होती हैं। क्रेडिट फैसिलिटी नहीं मिल पाता और पैसों का जुगाड़ करना चुनौती बन जाता है। टैक्नॉलॉजी सप्पोर्ट की कमी और कॅपिटल क्रंच की वजह से कई लोगों के लिए बिज़नेस को आगे बढ़ाना चॅलेंज बन जाता है, बिलकुल वैसे ही जैसे कईयों के लिए क्रेडिट फैसिलिटी और फंडिंग पाना एक चॅलेंज है। इस वजह से ज़्यादातर मायक्रो एस.एम.ई. काँपिटिटिव नहीं रह पाते या सालों तक मुनाफा नहीं कमा पाते।

ई-इनवॉइसिंग के ज़रिए पेमेंट को स्ट्रीमलाईन करना

इन सभी बातों को मन में रखते हुए स्पायडर-जी ने माइक्रो एस.एम.ई. के लिए ई-इनवॉइसिंग एप लाँच किया है जो खासकर पेमेंट और रीसीवेबल्स को कारगर तरीके से मॅनेज करता है और लोगों या बिज़नॆस के लिए एकाउंटिंग प्रॉसॆस को स्ट्रीमलाईन करता है। इसमें मुख्य टार्गॆट-ऑडियन्स ऐसे बिज़नॆस होते हैं जिन्हें बार-बार बिल्स जनरेट करने पडते हैं, जैसे कि होस्टल्स, मेस, बस ट्रांसपोर्ट, हाउसिंग सोसाइटी, योगा, ऐरोबिक्स या दूसरे फिटनेस क्लासेज़। यहाँ जिन बिज़नेस का ज़िक्र किया गया है, उन्हें अकसर ऐसी समस्याओं का सामना करना पडता है जैसे पेमेंट में डिफॉल्ट या देरी, चेक बाउँस होना, अकाउँट को रीकंसाईल करना, इत्यादी। डिजिटल प्लॅटफॉर्म का इस्तेमाल करने से ना सिर्फ इनवॉइसिंग से जुड़ी समस्याएँ कम हो जाती हैं, बल्कि आपके बिज़नेस को वर्किंग कॅपिटल को अच्छी तरह मॅनेज करने में भी मदद करता है।

एलॆक्ट्रानिक इंवॉइसॆस के बारे में अधिक जानकारी

स्पायडर-जी के ज़रिए ई-इनवॉइसिंग ने 2000 से भी ज़्यादा बिज़नेस को वर्किंग कॅपिटल की घोर तंगी से जुड़ी समस्याओं को हल करने में मदद दी है। ई-इनवॉइसिंग ने रीसीवेबल्स और पेयेबल्स को कुशलता से मॅनेज करके कई बिज़नेस के काम करने के तरीके को बदल दिया है।  स्पायडर-जी में ऐसे ढेरों फीचर्स हैं जो बिज़नेस के वर्किंग कॅपिटल को सफलतापूर्वक मॅनेज करने में मदद करता है। इनके कुछ फीचर्स और फायदे यूँ हैं –

ऑटोमेटेड पेमेंट रिमाइंडर्स– इंवॉइस ड्यू डेट से पहले, उस तारीख को, या उसके बाद, इंवॉइसॆस के अनलिमिटेड पेमेंट रिमाइंडर्स भेजे जा सकते हैं

ओवरड्यू पेमेंट्स के रिमाइंडर्स और फॉलो-अप– इसे समझाने की ज़रूरत नहीं है। यह फीचर कस्टमर से ओवरड्यू बिल्स और पेमेंट्स के लिए लगातार फॉलो-अप करने में मदद करता है

रिकर्रिंग इंवॉइसिंग- ये पेमेंट्स और रीसीवेबल्स के रिकर्रिंग इंवॉइसिंग के ज़रिए, समय-समय पर होनेवाले पेमेंट्स को ट्रैक करने में मदद करता है

– एकाउंट्स का रीकनसिलिएशन-क्योंकि हर बिज़नॆस के एकाउंट्स का रीकनसिलिएशन अलग-अलग होता है, स्पाइडर-जी एप उम्मीदों और खर्चों के आधार पर प्रॉसॆस को आसान बनाता है।

-एक्सटरनल और इंटरनल कम्युनिकेशन को स्ट्रीमलाईन करना- इस फीचर से रीसीवेबल्स और पेमेंट को ट्रैक किया जा सकता है।

-बिज़नॆस की गहरी समझ– यह एप अपने बिज़नॆस और कस्टमर के साथ लेन-देन के बारे में ऐसी गहरी समझ देता है जिस पर काम किया जा सकता है।

आसान बुक कीपिंग-कस्टमर और वॆंडर के साथ सभी करंट ट्रांस्एक्शन को आसानी से देखा या पाया जा सकता है

जबकि माइक्रो एस.एम.ई. काफी समय से मॅनुअल अकाउँटिंग प्रोसेस इस्तेमाल करता आया है, लेकिन आज ई-इनवॉइसिंग का नया तरीका बड़ी तेज़ी से लोकप्रीय हो रहा है। स्पायडर-जी उन बिज़नेस और माइक्रो एस.एम.ई. के लिए सही प्लॅटफॉर्म साबित हुआ है जिन्हें अपने वर्किंग कॅपिटल को स्ट्रीमलाईन करने में दिक्कत हो रही है। इस ऐप में ई-इनवॉइसिंग के लिए ऐसे बेहतरीन फीचर्स हैं जो बिज़नेस को भविष्य में कुशलता पाने में मदद कर सकती है। यह प्लॅटफॉर्म यूज़र-फ्रेंडली है और इसमें यूज़र्स के लिए आसान निर्देश हैं, और इसकी फीज़ भी बहुत मामुली है। इतना ही नहीं, एक ज़िम्मेदार नागरिक के तौर पर आप पेपरलेस ट्रांजॅक्शन करके पर्यावरण को बचाने में अपना योगदान दे सकते हैं। आज ज़्यादा से ज़्यादा लोग और बिज़नेस इलेकट्रॉनिक इनवॉइसिंग अपना रहे हैं, जिसकी वजह से अकाऊँट्स में हेर-फेर होने या ग़लतियाँ होने का सवाल ना के बराबर होता है। दूसरी तरफ, बिज़नेस करनेवाले लोग और माइक्रो एस.एम.ई. स्पायडर-जी जैसे डिजिटल ई-इनवॉइसिंग प्लॅटफॉर्म के ज़रिए अपने बिज़नेस को कुशलता से चला सकते हैं।

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